उत्तराखंड में नए डीजीपी के रूप में 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी दीपम सेठ ने कार्यभार संभाल लिया हैं। कार्यभार संभालने से पहले दीपम सेठ ने उत्तराखंड शासन में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से मुलाकात की इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड के 13 वें डीजीपी के रूप में अपना कार्यभार संभाला। पद संभालने के बाद उन्होंने उत्तराखंड के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की इसके बाद उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता उत्तराखंड में अपराध को कम करना, ड्रग फ्री अभियान में तेजी लाना और सीमा पर तैनात जवानों के परिवारों की सुरक्षा सबसे ज्यादा अहम होगी।

दीपम सेठ का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ। उन्होंने सीनियर सेकेंडरी की शिक्षा शेरवुड कॉलेज, नैनीताल से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने BITS पिलानी से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की।
पुलिस महानिदेशक द्वारा 1995 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में प्रवेश किया। उनके अध्ययन के प्रति समर्पण ने उन्हें 1997 में ओस्मानिया विश्वविद्यालय से पुलिस प्रबंधन में मास्टर्स की डिग्री और 2022 में आईआईटी रुड़की से पीएचडी प्राप्त करने की प्रेरणा दी।
पुलिस महानिदेशक ने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर उत्कृष्टता के साथ कार्य किया है। इनमें शामिल हैं:
पुलिस अधीक्षक: टिहरी गढ़वाल और ज्योतिबा फुले नगर।
सेनानायक, पीएसी: 41वीं वाहिनी पीएसी, मेरठ।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन, कोसोवो: जहां उन्होंने प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में कार्य किया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल।
पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी): गढ़वाल परिक्षेत्र, क्राइम और लॉ एंड ऑर्डर, पीएसी, प्रशिक्षण।
पुलिस महानिरीक्षक (आईजी): लॉ एंड ऑर्डर, स्पेशल टास्क फोर्स, पुलिस मुख्यालय, पी एंड एम
ITBP में IG, North West Frontier, Ladakh, IG (Personnel, Establishment & Vigilance), ITBP Dte Genl, New Delhi
अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) एस०एस०बी० (SSB)
*भविष्य की प्राथमिकताएं*
पुलिस महानिदेशक, ने उत्तराखंड पुलिस की भविष्य की चुनौतियों को लेकर अपनी प्राथमिकताएं बतायी।
1. कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना और अपराधों पर नियंत्रण।
2. मादक पदार्थों की तस्करी पर सख्त कार्यवाही।
3. साइबर सुरक्षा को मजबूत करना।
4. आपदा प्रबंधन के लिए तैयारियों को उन्नत करना।
5. पुलिसिंग को पारदर्शी और जनहितैषी बनाना।
6. यातायात प्रबंधन और सड़क दुर्घटनाओं के रोकथाम हेतु प्रभावी कार्यवाही।
7. महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष पहल करना।











