पूरे देश में लोक आस्था के महापर्व छठ की धूम है। उत्तराखंड में भी छठ पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
देहरादून में अलग अलग घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी है और लोगों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। इसी क्रम में पूरे प्रदेश में भी श्रद्धालुओं ने पूरे विधि विधान से छठ पूजा की और डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया।
आपको बता दें कि छठ पर्व में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय अर्घ्य देने का खास महत्व है. इस साल यानी 2024 में खरना के अगले दिन संध्या कालीन अर्घ्य और उसके अगले दिन सुबह के समय सूर्यदेव को अर्घ्य देने के समय को लेकर पंडितों ने अलग अलग बयान जारी किए थे। कहा जाता है कि संध्या कालीन अर्घ्य देने से घर परिवार के सदस्यों की उम्र लंबी और स्वास्थ्य अच्छा होता है. छठ पूजा में अर्घ्य देने के लिए व्रती के साथ पूरा परिवार नदी या तालाब किनारे जाता है. वहां बांस से बने डलिया में पूजन का सामान रखा जाता है।
छठ पूजा में भगवान सूर्य देव और छठी माता का पूजन किया जाता है. तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और सूर्य देव की उपासना की जाती है. छठ महापर्व में महिलाएं अपने बच्चों पर परिवार की सखु-समृद्धि के लिए 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं. इस व्रत को बहुत ही कठिन व फलदायी माना गया है।











